तरावड़ी में लौकी के भाव से किसान परेशान, लागत तक नहीं निकलने का दावा; सरकार से उचित मूल्य दिलाने की मांग
तरावड़ी। लौकी के उचित दाम नहीं मिलने से परेशान किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को आक्रोशित किसानों ने अपनी मेहनत की फसल घीया सड़कों पर फेंककर विरोध जताया। किसानों का कहना है कि बाजार में मिल रहे कम दाम से खेती में आई लागत तक पूरी नहीं हो पा रही है।
पधाना के किसान विजय राणा, दीपक, मुकेश, रिंकू, धूम सिंह राणा, प्रवीन, कुलदीप पंडित, सत्यवान और पवन राणा शेखर ने अपनी परेशानी बताई। किसानों के अनुसार घीया की फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च आता है। इसके बावजूद फसल तैयार होने के बाद उचित भाव नहीं मिल रहा।
कम भाव ने किसानों की उम्मीदों पर फेरा पानी
किसानों ने बताया कि वर्तमान में घीया के बेहद कम भाव मिलने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। कई बार मंडी तक फसल पहुंचाने और उसकी ढुलाई का खर्च तक पूरा नहीं हो पाता।
उचित मूल्य नहीं मिलने से निराश किसानों ने अपनी फसल सड़क पर फेंककर रोष जताया। किसानों का कहना है कि खेती पहले ही मौसम की मार और लगातार बढ़ती लागत के कारण जोखिम भरा काम बन चुकी है। ऐसे में फसल तैयार होने के बाद भी सही दाम नहीं मिलना उनके लिए दोहरी मार है।
सरकार से उचित बाजार और भाव की मांग
किसानों ने सरकार और संबंधित विभागों से सब्जी उत्पादक किसानों की फसलों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सब्जियों के भाव में स्थिरता लाने के साथ उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए।
इसके अलावा किसानों ने बिचौलियों की भूमिका पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग भी रखी है।
खेत से बाजार तक कीमतों में अंतर पर उठाए सवाल
किसानों का कहना है कि खेत से उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते सब्जियों के दाम कई गुना बढ़ जाते हैं, लेकिन फसल उगाने वाले किसान को उसकी मेहनत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल पाता।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता महंगे दाम पर सब्जी खरीदता है तो किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य क्यों नहीं मिलता।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
किसानों में समस्या को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया और फसलों के उचित दाम सुनिश्चित नहीं किए गए तो उन्हें बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

