Site icon

तीन मौतों के बाद जागे अफसर, हादसे के छठे दिन गड्ढे में डाला तारकोल

काछवा-बहलोलपुर रोड की पुलिया के गड्ढे में विभाग ने डाली सड़क निर्माण सामग्री, ग्रामीण बोले-लापरवाही छिपाने की कोशिश; सड़क पर खतरा अब भी बरकरार

करनाल/काछवा। काछवा-बहलोलपुर रोड की पुलिया के पास गहरे गड्ढे के कारण हुए दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत के छठे दिन सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। मंगलवार को विभाग की टीम ने गड्ढे में तारकोल और सड़क निर्माण सामग्री डालकर उसे भरने का प्रयास किया। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढा भरने के बाद भी सड़क और पुलिया की सतह के बीच अंतर बना हुआ है, जिससे हादसे का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

हादसे के छह दिन बाद हुई गड्ढे की मरम्मत

मंगलवार को सिंचाई विभाग की टीम काछवा-बहलोलपुर रोड पर पहुंची। टीम ने पुलिया के पास बने गड्ढे में करीब चार तसले तारकोल और सड़क निर्माण सामग्री डाली। इससे गड्ढे की गहराई कुछ कम जरूर हुई, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार मरम्मत का काम संतोषजनक नहीं है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंभीर हादसे के बाद विभाग ने केवल औपचारिकता पूरी की है।

ग्रामीण बोले-लापरवाही छिपाने के लिए की गई खानापूर्ति

स्थानीय निवासी निदान सिंह, रमेश और पप्पू ने कहा कि पुलिया के पास सड़क और सतह में अभी भी काफी अंतर है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने हादसे के बाद अपनी लापरवाही छिपाने के लिए गड्ढे में थोड़ा तारकोल डालकर खानापूर्ति की है।

ग्रामीणों के मुताबिक यह गड्ढा चार महीने से भी अधिक समय से बना हुआ था। इसे ठीक कराने के लिए कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग की गई, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ ने जताई हादसे की आशंका

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट राजकुमार का कहना है कि सड़क और पुलिया की सतह में अभी भी अंतर होने के कारण दूर से आने वाले वाहन चालकों को अचानक झटका लग सकता है। ऐसे में हादसे की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि सड़क की सतह को पूरी तरह समतल करना जरूरी है, ताकि वाहन चालकों को अचानक गड्ढे या ऊंच-नीच का सामना न करना पड़े।

हादसे के दिन भी JE ने किया था निरीक्षण: XEN

सिंचाई विभाग के एक्सईएन विकास राज ने बताया कि गड्ढा भरवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि हादसे वाले दिन भी जेई ने मौके का निरीक्षण किया था और इसके बाद अधिकारियों को सड़क के गड्ढों को तुरंत भरने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे से पहले ही यदि गड्ढे की मरम्मत कर दी जाती तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। अब ग्रामीण सड़क की पूरी और सुरक्षित मरम्मत की मांग कर रहे हैं।

Exit mobile version