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शिक्षा मंत्री प्रधान का त्यागपत्र संविधान की जीत: रमेश सैनी

आंदोलन जाति पात धर्म और क्षेत्र वाद से ऊपर उठ कर था

सीजीपी के 31 दिन पुराने आंदोलन के बाद देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा आज अपने पद से त्यागपत्र देने के घटनाक्रम को कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री रमेश सैनी ने लोकतंत्र की जीत बताया हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में पहली बार हुआ हैं जब कि मोदी सरकार के मंत्री को जनआंदोलन के कारण अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा हैं। यह सब भारतीय संविधान की जीत हैं। उन्होंने कहा कि   जिस तरह से देश में युवाओं ने एकजुटता दिखाते हुए शिक्षा में सुधार के लिए छात्र आंदोलन किया उसने आजादी के समय के आंदोलनों की याद दिला दी। छात्रों में शहीद ए आजम भगत सिंह राजगुरु चंद्रशेखर आजाद महात्मा फुले का प्रतिविंव दिख रहा था।

उन्होंने कहा कि छात्राओं में महारानी लक्षी वाई सावित्री फुले , जैसी महान हस्तियों की छाप पड़ रही थी। उन्होंने कहा कि आज यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में दमन के लिए कोई जगह नहीं हैं। छात्रों ने धैर्य के साथ शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन किया। वह दमन के आगे झुके नहीं आाखिरकार उन्होंने सरकार को एकजुटता के आगे झुकने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि देश में चारों तरफ छात्र आंदोलन की धूम मची हुई थी। हर तरफ युवा आंदोलन को लेकर संकल्पित थे। पहली बार दिखाई दिया कि आंदोलन जाति पात धर्म और क्षेत्र वाद से ऊपर उठ कर था। उन्होंने छात्रों को आंदोलन की सफलता के लिए बधाई दी।

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