करनाल। देश और प्रदेश के लिए मेडल जीतने का सपना लेकर खिलाड़ी रोज सुबह अंधेरे में उठकर मैदान का रुख करते हैं। सुबह करीब चार बजे से दो घंटे अभ्यास, इसके बाद स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई और शाम को फिर ढाई घंटे की कड़ी मेहनत। खिलाड़ियों की यह दिनचर्या किसी तपस्या से कम नहीं है। लेकिन जब इतनी मेहनत के बाद भी उन्हें बेहतर खेल सुविधाएं, उपकरण और समय पर खुराक भत्ता नहीं मिलता, तो पदक की राह मुश्किल हो जाती है।
वीरवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में खिलाड़ियों ने अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं। खिलाड़ियों ने बताया कि कर्ण स्टेडियम और सरकारी खेल नर्सरियों में उन्हें फिलहाल नि:शुल्क प्रशिक्षण तो मिल रहा है, लेकिन बेहतर खेल सुविधाओं और उपकरणों की कमी बनी हुई है। कई खिलाड़ी अपने खेल का सामान खुद खरीदते हैं, जिसका खर्च उनके अभिभावकों को उठाना पड़ता है।
बदहाल मैदान और उपकरणों की कमी बनी परेशानी
खिलाड़ियों का कहना है कि कई जगह ट्रैक और मैदान की स्थिति बेहतर नहीं है। खेल के अनुसार जरूरी उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को अतिरिक्त खर्च करके अपने स्तर पर सामान जुटाना पड़ता है। कुछ खेलों के कोच खिलाड़ियों की प्रतिभा और मेहनत को देखते हुए बेहतर उपकरण खरीदने में अपनी ओर से मदद भी करते हैं।
समय पर नहीं मिलता खुराक भत्ता
खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी समस्या खुराक भत्ते को लेकर है। खिलाड़ियों के अनुसार प्रतिमाह मिलने वाला खुराक भत्ता कई बार छह महीने बाद या खेल नर्सरी का कार्यकाल समाप्त होने के करीब एक साल बाद मिलता है। ऐसे में जिस समय खिलाड़ी को पौष्टिक आहार और बेहतर खान-पान की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस समय आर्थिक मदद नहीं मिल पाती।
कैश अवॉर्ड और स्कॉलरशिप भी लंबित
स्कूल खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मिलने वाले कैश अवॉर्ड और एसजीएफआई (स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) की स्कॉलरशिप भी कई वर्षों से लंबित होने की बात खिलाड़ियों ने कही। खिलाड़ियों का कहना है कि पुरस्कार और छात्रवृत्ति समय पर मिलने से उनका उत्साह बढ़ता है और परिवार पर आर्थिक बोझ भी कम होता है।
समय पर सुविधाएं मिलें तो बढ़ेंगे पदकों के अवसर
खिलाड़ियों ने कहा कि प्रतिभा और मेहनत की उनके पास कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ बेहतर ट्रैक, पर्याप्त खेल उपकरण, पौष्टिक खुराक और समय पर भत्ते की है। यदि खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के साथ जरूरी सुविधाएं और आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए, तो करनाल से प्रदेश और देश के लिए और अधिक पदक लाए जा सकते हैं।
खिलाड़ियों का कहना है कि मेडल जीतने का सपना मैदान में मेहनत से पूरा होता है, लेकिन उस मेहनत को सही दिशा देने के लिए बुनियादी सुविधाओं और सरकार की समय पर मदद भी उतनी ही जरूरी है।

