पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेना के जवानों और उनके परिवारों के पेंशन अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आकस्मिक छुट्टी पर रहते हुए किसी सैन्यकर्मी की कार्डियक अरेस्ट से मौत होने मात्र से उसे सैन्य सेवा से अलग नहीं माना जा सकता। इस फैसले से ऐसे सैनिक परिवारों को बड़ी राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
सक्रिय ड्यूटी पर नहीं था, फिर भी सेवा में था जवान
हाई कोर्ट ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि मृत्यु के समय सैन्यकर्मी सेवा में था या नहीं। केवल यह आधार नहीं बनाया जा सकता कि वह उस समय सक्रिय ड्यूटी पर नहीं था। इसी आधार पर अदालत ने सैनिक की विधवा को सामान्य पारिवारिक पेंशन के बजाय विशेष पारिवारिक पेंशन देने के आदेश को बरकरार रखा।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। केंद्र सरकार ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, क्षेत्रीय पीठ चंडीगढ़ के 15 दिसंबर 2022 के आदेश को चुनौती दी थी।
छुट्टी के पहले ही दिन कार्डियक अरेस्ट से हुई थी मौत
मामले से जुड़े सैन्यकर्मी की 17 जनवरी 2017 को कार्डियक अरेस्ट से मौत हुई थी। वह 16 जनवरी से 30 जनवरी 2017 तक स्वीकृत आकस्मिक छुट्टी पर था और 17 जनवरी उसकी छुट्टी का पहला दिन था। उस समय तक वह 17 वर्ष से अधिक की सैन्य सेवा पूरी कर चुका था।
जवान की मौत के बाद उसकी पत्नी ने विशेष पारिवारिक पेंशन के लिए सशस्त्र बल न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था।
न्यायाधिकरण ने भी विधवा के पक्ष में दिया था फैसला
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने 15 दिसंबर 2022 को विधवा की याचिका स्वीकार करते हुए 18 जनवरी 2017 से विशेष पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
केंद्र की ओर से दलील दी गई कि जवान की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई थी और वह उस समय सक्रिय ड्यूटी पर नहीं था, इसलिए उसकी मौत को सैन्य सेवा से नहीं जोड़ा जा सकता।
हाई कोर्ट ने केंद्र की दलील को नहीं माना
हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और न्यायाधिकरण के आदेश को बरकरार रखा। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह रहा कि जवान की मृत्यु के समय वह स्वीकृत छुट्टी पर होने के बावजूद सैन्य सेवा में था।
फैसले से उन सैनिक परिवारों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है, जिनके परिवार के सदस्य स्वीकृत छुट्टी के दौरान सेवा में रहते हुए असामयिक मृत्यु का शिकार होते हैं।

