हरियाणा: राज्य में 3 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों की शुरुआती शिक्षा को और अधिक रोचक, व्यावहारिक और गतिविधि आधारित बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब छोटे बच्चों की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें खेल-खेल में सीखने, गतिविधियों और नए शिक्षण संसाधनों से जोड़ने के लिए प्रदेश के हर जिले में एक-एक मॉडल बालवाटिका विकसित की जाएगी।
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से इस संबंध में राज्य के सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। योजना के तहत जिला स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा, जो उपयुक्त विद्यालयों का चयन कर वहां मॉडल बालवाटिका विकसित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगी।
समग्र शिक्षा योजना के तहत होगी शुरुआत
यह पहल केंद्र सरकार की समग्र शिक्षा योजना के तहत लागू की जाएगी। प्रत्येक जिले में मॉडल बालवाटिका स्थापित करने के लिए 5 लाख रुपये तक का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अलावा जरूरत के अनुसार अन्य आवश्यक धनराशि भी जिलों को अलग से उपलब्ध कराई जाएगी।
खेल और गतिविधियों के जरिए होगी पढ़ाई
मॉडल बालवाटिकाओं का मुख्य उद्देश्य बच्चों को विद्यालयी शिक्षा की मजबूत और आनंददायक शुरुआत देना है। यहां खेल आधारित, गतिविधि आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा।
बच्चों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, जिनके माध्यम से वे खेलते हुए नई चीजें सीख सकें। सरकार का उद्देश्य है कि शुरुआती उम्र में बच्चों के लिए पढ़ाई बोझ न बने, बल्कि वे इसे आनंद और उत्साह के साथ सीखें।
जिला स्तर पर होगा स्कूलों का चयन
जिला स्तरीय समिति ऐसे विद्यालयों का चयन करेगी, जहां मॉडल बालवाटिका विकसित करने के लिए पर्याप्त स्थान और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों। चयनित स्कूलों में बच्चों की उम्र और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षण सामग्री तथा गतिविधियों की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार की इस पहल से प्रदेश में प्रारंभिक बाल शिक्षा को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करने और स्कूल में उनकी मजबूत नींव तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा।

