22 दिन से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, पुराने शहर से सेक्टरों तक सफाई व्यवस्था प्रभावित; गर्मी-उमस में दुर्गंध से लोग परेशान
करनाल। नगर निगम की ओर से भले ही वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नौ दिनों में शहर से करीब 1100 टन कूड़ा उठाने और 80 प्रतिशत कचरे के ढेर खत्म करने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर नजर आ रहे कूड़े के ढेर इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पुराने शहर के बाजारों से लेकर कॉलोनियों, सेक्टरों और मुख्य सड़कों तक कई जगह कूड़ा जमा है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की 22 दिनों से हड़ताल जारी है। इसका सबसे ज्यादा असर सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा कूड़े के उठान पर दिखाई दे रहा है। निगम की ओर से वैकल्पिक कर्मचारियों और संसाधनों के जरिए सफाई व्यवस्था संभालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन रोजाना निकलने वाले कूड़े की मात्रा और मौजूदा व्यवस्था के बीच अंतर के कारण कई जगह स्थिति बिगड़ती नजर आ रही है।
रोजाना निकलता है करीब 220 टन कूड़ा
करनाल शहर से रोजाना करीब 220 टन कूड़ा निकलता है। सामान्य दिनों में नगर निगम के सफाई कर्मचारी सड़कों, बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य क्षेत्रों से कूड़ा उठाते हैं।
फिलहाल सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण यह व्यवस्था प्रभावित हुई है। निगम का दावा है कि डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था चालू रखी गई है, जिसके चलते घरों से निकलने वाला कूड़ा काफी हद तक उठाया जा रहा है।
हालांकि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पड़े कूड़े को उठाने के लिए पर्याप्त सफाई कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने से समस्या बनी हुई है।
नौ दिनों में 1100 टन कूड़ा उठाने का दावा
नगर निगम आयुक्त सलोनी शर्मा के अनुसार, हड़ताल के बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था को पूरी तरह ठप नहीं होने दिया गया है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नौ दिनों में करीब 1100 टन कूड़ा उठाया गया है।
इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि कई स्थानों पर कूड़ा नियमित रूप से नहीं उठ रहा और ढेर जस के तस पड़े हुए हैं।
पुराने शहर से सेक्टरों तक बिगड़े हालात
सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का असर केवल पुराने शहर तक सीमित नहीं है। शहर के बाजारों, कॉलोनियों और सेक्टरों में भी जगह-जगह कूड़े के ढेर नजर आ रहे हैं।
कई जगह सड़क किनारे जमा कूड़े के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। गर्मी और उमस के बीच लंबे समय तक कूड़ा पड़े रहने से दुर्गंध की समस्या भी बढ़ रही है।
बेसहारा पशु कूड़ा सड़क पर फैला रहे
लोगों का कहना है कि नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठने के कारण बेसहारा पशु कूड़े के ढेरों को सड़क पर फैला देते हैं। इससे सड़क और आसपास का क्षेत्र और अधिक गंदा हो जाता है।
स्वच्छता रैंकिंग पर भी पड़ सकता है असर
सफाई व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहने का असर शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर भी पड़ने की आशंका है। एक ओर निगम वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए कूड़ा उठाने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहे कूड़े के ढेर व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

