दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान शाखा करनाल में संस्थान के प्रकल्प ‘आरोग्य’ के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 (365 दिन योग) को समर्पित एक विशेष योग एवं ध्यान शिविर का आयोजन उत्साह, ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण में किया गया। शिविर का उद्देश्य योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली, जागरूक सोच और वैश्विक शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना था। शिविर में बड़ी संख्या में योग साधकों, श्रद्धालुओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों ने भाग लिया तथा योग और ध्यान के विभिन्न अभ्यासओं का लाभ प्राप्त किया । कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संस्थापक एवं संचालक आशुतोष महाराज जी की साध्वी शिष्यों द्वारा योग प्राणायाम और ध्यान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन और महान परंपरा है जो व्यक्ति के शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वर्तमान समय की व्यस्त और असंतुलित जीवन शैली के कारण अधिकांश लोग तनाव, चिंता और विभिन्न शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में योग एक प्रभावी और प्राकृतिक समाधान प्रदान करता है।
साध्वी मुमुक्षा भारती ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि चेतना के उत्कर्ष का विज्ञान है। आज अधिकांश लोग कुछ आसनों और व्यायामों को योग समझ लेते हैं, जबकि योग का वास्तविक स्वरूप इससे कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने बताया कि योग शब्द संस्कृत की उसे ‘युज’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है जुड़ना। योग व्यक्ति को स्वयं से समाज से और परम चेतना से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने महर्षि पतंजलि के प्रसिद्ध सूत्र ”योग: चित्तवृत्ति निरोध:” का उल्लेख करते हुए कहा कि चित्त की मृत्यु का निरोध ही वास्तविक योग है। योग का उद्देश्य केवल शरीर को स्वस्थ बनाना नहीं बल्कि मन को शांत और आत्मा को जागृत करना भी है। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को अनुलोम विलोम नाड़ी शोधन प्राणायाम सहित ताड़ासन दंडासन दंडासन भुजंगासन और अन्य महत्वपूर्ण योगासन करवाए गए।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से संतुलित, और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है। साध्वी जी ने उपस्थित लोगों को अपने आचार, आहार,और व्यवहार में संतुलन लाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल योगासन ही नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली भी आवश्यक है। शिविर के अंत में भी सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
उपस्थित साधकों ने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के साथ-साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी दिखाते हैं।