करनाल। करनाल की धरती पर जन्मे, पले-बढ़े और शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात हरियाणा पुलिस में सिपाही भर्ती होकर उपनिरीक्षक पद पर पहुंचे डॉ. अशोक कुमार वर्मा आज देशभर में पुलिस विभाग के सर्वोच्च रक्तदाता के रूप में जाने जाते हैं। रक्तदान के प्रति उनका समर्पण उन्हें लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनाता है। वे अब तक 183 बार रक्तदान, 89 बार प्लेटलेट्स दान तथा 1 बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। वर्ष 1990 से शुरू हुई उनकी रक्तदान यात्रा आज भी निरंतर जारी है। डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा करनाल में प्राप्त की। वे राजकीय महाविद्यालय करनाल के छात्र तथा एनसीसी कैडेट रहे हैं। वर्ष 1990 में उन्होंने डीएवी कॉलेज, करनाल में पहली बार रक्तदान किया था। यही वह अवसर था जिसने उनके जीवन में सेवा और मानवता की एक नई राह खोल दी

रक्तदान के प्रति उनका समर्पण एक व्यक्तिगत अनुभव के बाद और अधिक मजबूत हो गया। उनके पुत्र के जन्म के समय वह गंभीर पीलिया से पीड़ित हो गया था और चिकित्सकों ने रक्त बदलने की आवश्यकता बताई। उस समय डॉ. वर्मा ने स्वयं रक्तदान कर अपने पुत्र के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस घटना ने उनके मन में यह संकल्प पैदा किया कि वे जीवनभर रक्तदान करेंगे और जरूरतमंद लोगों की सहायता करते रहेंगे। उनके जीवन की एक अन्य प्रेरणादायक घटना भी पहले रक्तदान से जुड़ी है। पहली बार रक्तदान करने पर परिवार के कुछ सदस्यों ने इसे उचित नहीं माना, जिससे वे कुछ निराश हुए। लेकिन उसी दिन उनके पिता स्वर्गीय कली राम, जो भारतीय सेना में सैनिक रहे थे, ने उनका उत्साह बढ़ाते हुए कहा, “रक्तदान महादान है, आपने बहुत अच्छा कार्य किया है और इसे निरंतर जारी रखना चाहिए।” पिता के इन शब्दों ने उनके जीवन की दिशा तय कर दी और उन्होंने रक्तदान को अपना मिशन बना लिया।आपने बहुत अच्छा कार्य किया है और इसे निरंतर जारी रखना चाहिए।” पिता के इन शब्दों ने उनके जीवन की दिशा तय कर दी और उन्होंने रक्तदान को अपना मिशन बना लिया। अपने सैनिक पिता की स्मृति को जनसेवा से जोड़ते हुए डॉ. वर्मा ने 26 नवम्बर 2010 को उनकी पुण्यतिथि पर करनाल में पहला स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया। तब से वे प्रतिवर्ष अपने पिता स्वर्गीय कली राम की स्मृति में रक्तदान शिविर आयोजित करते आ रहे हैं। डॉ. अशोक कुमार वर्मा अब तक 590 स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का आयोजन कर चुके हैं। इन शिविरों में 21,076 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया है। इससे लगभग 63,228 जरूरतमंद मरीजों, थैलेसीमिया पीड़ितों और दुर्घटनाग्रस्त लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इसके अतिरिक्त वे विभिन्न माध्यमों से आपातकालीन परिस्थितियों में भी रक्त उपलब्ध करवाने में सक्रिय रहते हैं और अब तक 80 हजार से अधिक लोगों तक रक्त उपलब्ध कराने में सहयोग कर चुके हैं। डॉ. वर्मा की रक्तदान यात्रा केवल उनकी व्यक्तिगत सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने इसे एक पारिवारिक संस्कार और सामाजिक जनआंदोलन का रूप दे दिया है। उनका पूरा परिवार रक्तदान के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। चाहत स्टूडियो के स्वामी उनके स्वर्गीय भाई विनोद कुमार वर्मा 70 से अधिक बार रक्तदान कर चुके थे। उनके बड़े भाई सतपाल वर्मा तथा यशवंत वर्मा भी अनेक बार रक्तदान कर चुके हैं। उनके एक भाई नरेश कुमार खिप्पल 50 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। उनके बहनोई धर्मेंद्र वर्मा, भांजे-भांजियां तथा भतीजेभतीजियां भी नियमित रूप से रक्तदान कर समाजसेवा में योगदान देते हैं। उनके सुपुत्र अक्षय वर्मा, सुपुत्री प्रियांका वर्मा, जो हरियाणा में न्यायिक सेवा में कार्यरत हैं, तथा छोटी पुत्री दिवा वर्मा भी अनेक बार रक्तदान कर चुकी हैं। उनकी धर्मपत्नी भी रक्तदान एवं सामाजिक कार्यों में निरंतर उनका सहयोग करती हैं। परिवार के सभी सदस्यों का यह समर्पण दर्शाता है कि रक्तदान उनके परिवार की जीवनशैली और संस्कार का हिस्सा बन चुका है। न केवल परिवार, बल्कि अपने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों को भी डॉ. वर्मा ने रक्तदान के इस अभियान से जोड़ा है। उनके प्रेरक प्रयासों से सैकड़ों लोग नियमित रक्तदाता बने हैं और मानवता की सेवा के इस महायज्ञ में सहभागी बन रहे हैं। रक्तदान के क्षेत्र में उनकी अतुलनीय सेवाओं के लिए उन्हें हरियाणा के महामहिम राज्यपाल द्वारा दो बार स्वर्ण पदक प्रदान किया जा चुका है। उन्हें राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। सामाजिक सेवा, रक्तदान जागरूकता और मानवता की सेवा के लिए उन्हें विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित किया गया है। पुलिस सेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें 26 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। वर्तमान में वे मधुबन स्थित हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में जागरूकता एवं पुनर्वास गतिविधियों से जुड़े हुए हैं तथा पूरे हरियाणा में नशामुक्ति अभियान को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। डॉ. अशोक कुमार वर्मा केवल रक्तदान तक सीमित नहीं हैं। वे रोटी बैंक के प्रधान के रूप में भी समाजसेवा के अनेक कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं। साइकिल यात्राओं, जन-जागरण कार्यक्रमों, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान जागरूकता और नशामुक्ति अभियानों के माध्यम से वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। डॉ. अशोक कुमार वर्मा का जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि एक व्यक्ति सेवा का संकल्प ले ले, तो वह हजारों लोगों के जीवन में आशा, विश्वास और नई ऊर्जा का संचार कर सकता है। करनाल की इस महान विभूति ने रक्तदान को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनसेवा का आंदोलन बना दिया है। उनकी रक्तदान यात्रा न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है और आने वाली पीढ़ियों को मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी रुचि इस बात का प्रतीक है कि वे नियमित शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वे पीएचडी इन लॉ, मास्टर ऑफ़ कॉमर्स, मास्टर ऑफ़ फिलोसॉफी, मास्टर ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, मास्टर ऑफ़ लॉज़, मास्टर ऑफ़ साइकोलॉजी, पीजी इन साइबर लॉ आदि अनेक उच्च शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं।