महाप्रभावी श्री घंटाकर्ण महावीर देवता के विशेष कृपा दिवस कृष्ण चौदस पर भक्ति संगम का आयोजन घंटाकर्ण महावीर तीर्थस्थान इंद्री रोड़ पर भक्तिभावनापूर्वक किया गया। सर्वप्रथम घंटाकर्ण बीजमंत्र के सामूहिक जाप से लोगमंगल तथा सभी के कल्याण की कामना की गई ।
साध्वी जागृति, पुष्पा गोयल, दीपक जैन,अनिता जैन, सुनीता जैन, निशा जैन,जयपाल सिंह, प्रवीण जैन- सरिता जैन, सुधा जैन, दिनेश जैन ने सुमधुर भक्ति गीत प्रस्तुत किए। दादा अपने दर से अब तो न टालो गिरा जा रहा हूँ अब तो उठा लो,जीवन की रुलाती घड़ियों में मिलता है तुम्हारा प्यार मुझे कुछ चाह न बाक़ी रहती है दादा आके दरबार तेरे,मुझे कौन पूछता था तेरी बंदगी से पहले मैं ख़ुद को ढूँढता था तेरी बंदगी से पहले,मांगा है मैंने बाबा से वरदान एक ही, तेरी कृपा बनी रहे जब तक है जिंदगी, जिस पर बाबा का हाथ हो, वह पार हो गया आया शरण जो तेरी उद्धार हो गया, आसमां से चांद तारे दिखें न दिखें मुझे तेरी झलक जरूर चाहिए, तुम्हीं मेरी नैया किनारा तुम्हीं हो; मेरी जिंदगी का सहारा तुम्ही हो, प्रभु वचनों को रखना संभाल के; इन वचनों में गहरा राज है, जहां ले चलोगे वहीं मैं चलूंगा; ना कोई उलाहना ना कोई मर्जी; कर लो करा लो जो प्रभु तेरी मर्जी; कहना भी होगा तो तुम्हीं से कहूंगा आदि भजनों की पंक्तियों ने भक्तिमई वातावरण बनाया।
महासाध्वी श्री प्रमिला जी महाराज ने महाप्रभावी श्री घंटाकर्ण देवता के संदर्भ में बतलाया कि भक्ति परमात्मा तथा दिव्य शक्तियों की कृपा रूपी ऊर्जा पाने का सर्वोत्तम तथा सबसे उपयोगी माध्यम है। भक्ति निष्काम होने पर ज्यादा फलदायिनी होती है। जैसे माँ संतान पर अपना वात्सल्य भाव उड़ेलती है, वैसे ही पारमात्मिक शक्तियां अपने भक्तों को निहाल करती हैं। दैवी शक्ति अप्रतिम शक्तियों से असंभव को भी संभव कर देती है। श्री घंटाकर्ण कृपानिधान भक्तों पर वात्सल्य बरसाने वाले देवता हैं जो सबको निहाल तथा मालामाल करते हैं। इनके उपासक का कोई विपत्ति कुछ बिगाड़ नहीं पाती और सभी अनुकूलताएं चुंबकीय आकर्षण से उसकी ओर खींची आती हैं ।घंटाकर्ण जी 52 वीरों में तीसवें वीर शिरोमणि तथा वीरों की परिषद में सेनापति का गौरवमयी स्थान प्राप्त प्रभावशाली देवता हैं जिन्हें जैन, हिंदू तथा बौद्ध तीनों परंपराओं में विशेष पूजनीय तथा आराध्य स्थान प्राप्त है। जैन परंपरा में इन्हें चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर का शासन रक्षक देव माना जाता है। वैदिक परंपरा में बद्रीनाथ तीर्थ का क्षेत्रपाल देवता, शिवजी का गण तथा उनके पुत्र कार्तिकेय का अभिन्न सहयोगी माना जाता है। मंत्र शास्त्रों में श्री घंटाकर्ण के मंत्रों तथा साधना- विधियों का उल्लेख मिलता है जो मनोरथ पूर्ति, संकल्प सिद्धि, भय निवारण, शारीरिक कष्ट मुक्ति, भूत-प्रेत संबंधी बाधा निवारण, राजकीय संकट से छुटकारा पाने में रामबाण औषधि के समान कार्य करती हैं।
साधना के क्षेत्र में श्री घंटाकर्ण जी की विलक्षण शक्तियां इन्हें सर्वमान्य स्थान देती हैं। अनेक अघोरी साधक तथा तांत्रिक भी श्री घंटाकर्ण जी की क्षमता से अनूठे चमत्कार दिखाते हैं ।
आरती तथा प्रीतिभोज की सेवा का लाभ पूर्व वरिष्ठ कर अधिकारी धन कुमार जैन- सुनीता जैन बाहुबली एंक्लेव दिल्ली ने लिया।