करनाल में बिजली कर्मचारियों का आक्रोश, ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ शक्ति भवन में प्रदर्शनकरनाल में बिजली कर्मचारियों का आक्रोश, ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ शक्ति भवन में प्रदर्शन

करनाल।
सरकारी नीतियों के खिलाफ बढ़ता कर्मचारी असंतोष अब खुलकर सड़कों पर नजर आने लगा है। करनाल में मंगलवार को हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (HSEB) वर्कर यूनियन से जुड़े कर्मचारियों ने सरकार की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी और लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध कुंजपुरा रोड स्थित पॉवर हाउस कॉलोनी के शक्ति भवन में करीब दो घंटे तक चला।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि यह पॉलिसी जमीनी हकीकत से दूर है और इससे विभागीय कार्य के साथ-साथ पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होगा।

कर्मचारियों की नाराजगी की वजह क्या है?

बिजली कर्मचारियों का कहना है कि ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के तहत ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरी तरह सिस्टम आधारित कर दिया गया है, जिसमें कर्मचारी की पारिवारिक स्थिति, स्वास्थ्य, अनुभव और स्थानीय जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यूनियन के अनुसार, फील्ड ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के लिए यह पॉलिसी व्यावहारिक नहीं है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब विभाग पहले से ही स्टाफ की कमी और तकनीकी चुनौतियों से जूझ रहा है, तो ऐसी नीति लागू करने से हालात और बिगड़ सकते हैं।

छह चरणों में चलेगा आंदोलन

यूनियन के सर्कल सचिव गुरमीत सिंह ने बताया कि यह आंदोलन अचानक नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि—

  • सब यूनिट स्तर से आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है
  • 17 से 19 दिसंबर तक हर डिवीजन में दो घंटे का प्रदर्शन किया जाएगा
  • 23 दिसंबर को टीएस सर्कल स्तर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित है

उन्होंने साफ किया कि जब तक कर्मचारियों की मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

शक्ति भवन में दिखी एकजुटता

प्रदर्शन के दौरान शक्ति भवन परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर नारेबाजी की और ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को कर्मचारी विरोधी बताया।

इस मौके पर सब यूनिट प्रधान सुनील राणा, रोहित भारद्वाज, आजाद शर्मा, यतिन आर्य, भूषण, सुनील, संदीप टूर्ण सहित कई कर्मचारी नेता और सदस्य उपस्थित रहे।

सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की आवाज नहीं सुनी, तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज किया जाएगा।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद यूनियन की ओर से प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि—

  • ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को तुरंत रद्द किया जाए
  • कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान किया जाए
  • किसी भी नई नीति से पहले कर्मचारियों और यूनियन से बातचीत की जाए

यूनियन नेताओं ने बताया कि यह ज्ञापन कर्मचारियों की सामूहिक भावनाओं को दर्शाता है।

आम जनता पर पड़ सकता है असर

बिजली विभाग से जुड़े इस आंदोलन का असर आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यदि आंदोलन लंबा चला, तो मेंटेनेंस और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत से ही इस मुद्दे का समाधान निकल सकता है।

अब आगे क्या?

फिलहाल सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से कर्मचारियों ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है, उससे साफ है कि मामला जल्द शांत होने वाला नहीं है।

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