31 सदस्यीय कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया फैसला, समाज को एकजुट करने और पांच मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प
करनाल, 18 अक्टूबर। पंजाबी बिरादरी भवन, सेक्टर-9, करनाल से संबंधित पांच प्रमुख मांगों को लेकर आज पंजाबी समाज की 31 सदस्यीय कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पंकज गाबा ने की। इस दौरान सभी सदस्यों ने पंजाबी समाज को मजबूत और एकजुट करने के लिए अपने-अपने विचार रखे तथा पांचों मांगों पर दोबारा विस्तार से विचार-विमर्श किया।
बैठक में प्रबंधन की ओर से अब तक कोई संतोषजनक सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर सदस्यों ने नाराजगी जताई। सभी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पंजाबी बिरादरी भवन प्रबंधन को समाधान के लिए सात दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं आता, तो अगले रविवार को बिरादरी भवन के प्रधान के निवास के बाहर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरना दिया जाएगा।
प्रबंधन ने कहा—मांगें हाउस मीटिंग में रखी जाएंगी, निर्णय सदस्यों की सहमति से होगा
पंकज गाबा ने बताया कि दो दिन पहले पंजाबी बिरादरी भवन के प्रवक्ता श्री देवेंद्र गांधी के साथ समाज के प्रतिनिधियों की बातचीत हुई थी। उस दौरान सभी पांच मांगें उनके सामने रखी गई थीं।
गाबा के अनुसार, आज प्रवक्ता की ओर से जवाब मिला कि इन मांगों पर प्रबंधन स्वयं निर्णय नहीं लेगा, बल्कि इन्हें हाउस मीटिंग में रखा जाएगा। यदि हाउस के सदस्य इन प्रस्तावों को पारित करते हैं, तभी मांगें स्वीकार की जाएंगी। साथ ही बताया गया कि हाउस मीटिंग तीन से चार महीने बाद आयोजित होगी।
इस पर पंकज गाबा ने कहा, “आखिर हमारी जायज मांगों को लेकर प्रबंधन को परेशानी क्या है? हम तो केवल पंजाबी समाज को एकजुट करने और हर पंजाबी को बिरादरी भवन से जोड़ने की बात कर रहे हैं। फिर प्रबंधन खुलकर बातचीत करने और समाधान निकालने के लिए आगे क्यों नहीं आ रहा?”
उन्होंने कहा, “यदि इन मांगों को हाउस मीटिंग में ही पारित करवाना है, तो हाउस के सदस्य भी करनाल के ही हैं। प्रबंधन चाहे तो नियमों के अनुसार जल्द बैठक बुलाकर इन प्रस्तावों पर निर्णय करवा सकता है। फिर तीन-चार महीने की देरी क्यों? हमें यह केवल मामले को टालने का प्रयास प्रतीत होता है।”
पंजाबी समाज की पांच प्रमुख मांगें
1. सदस्यता: ₹2100 में सभी पात्र पंजाबी समाज के लोगों के लिए सदस्यता खोली जाए।
2. चुनाव: प्रधान एवं प्रबंधन कमेटी के नियमित और निष्पक्ष लोकतांत्रिक चुनाव करवाए जाएं।
3. लीज़: पंजाबी बिरादरी भवन को लीज़ पर देने के कारणों और शर्तों की पूरी जानकारी समाज को दी जाए।
4. निःशुल्क बैठकें: पंजाबी समाज की बैठकों के लिए निःशुल्क स्थान और बुजुर्गों व युवाओं के लिए स्थायी मेल-मिलाप स्थल उपलब्ध करवाया जाए।
5. सामाजिक सुविधाएं: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामाजिक कार्यक्रमों तथा समाज के परिवारों की रस्म क्रिया एवं शोकसभाओं के लिए निःशुल्क स्थान उपलब्ध करवाया जाए।
समाज की एकता से बढ़कर कोई पद या कुर्सी नहीं: गाबा
पंकज गाबा ने कहा, “मैं प्रबंधन से पूछना चाहता हूं कि आखिर इन पांच मांगों में ऐसा क्या गलत है, जिन्हें स्वीकार करने में इतनी देरी की जा रही है? क्या हर पंजाबी को अपने समाज के भवन से जोड़ना गलत है? क्या बुजुर्गों और जरूरतमंद परिवारों को सुविधाएं देना गलत है? क्या लोकतांत्रिक चुनाव और पारदर्शिता की मांग करना गलत है?”
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति का विरोध करना नहीं है। “मुझे न प्रधान बनना है, न कोई पद चाहिए और न ही किसी से व्यक्तिगत लड़ाई है। मेरी पहली प्राथमिकता पंजाबी समाज को एकजुट करना है और इसके लिए मैं निरंतर प्रयास करता रहूंगा।”
गाबा ने कहा कि समाज ने बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रखा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि जायज मांगों को अनिश्चित समय तक टाला जाता रहे।
हम आज भी सम्मानजनक बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान के पक्षधर हैं। प्रबंधन को सात दिन का और अवसर दिया गया है। यदि सकारात्मक निर्णय नहीं आया, तो समाज के साथी अगले रविवार शांतिपूर्ण धरने के माध्यम से अपनी आवाज उठाएंगे। धरना भी कानून और शांति व्यवस्था का पालन करते हुए दिया जाएगा।”
बैठक में इन सदस्यों ने रखे अपने विचार
बैठक में प्रमुख रूप से प्रवेश अरोड़ा, सोमनाथ डावर, एडवोकेट प्रदीप, राजेश अरोड़ा, विनोद चौधरी, ललित अरोड़ा, ललित आहूजा, विशाल अरोड़ा, राकेश कक्कड़, विशाल चोपड़ा, सैम खत्री, दीपक मेहता, मुकेश वर्मा, पंकज चुघ, बृजेश भल्ला, वीरेंद्र मेहता, सौरव खन्ना, साहिल अरोड़ा, भारत भूषण और सुदर्शन पाहुजा सहित अन्य साथी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने पंजाबी समाज की एकता को सर्वोपरि रखते हुए पांचों मांगों के समाधान तक संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।
